ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) आज भारत में महिलाओं में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला कैंसर बन चुका है। हर साल लगभग 1.78 लाख नए मामले सामने आते हैं। इनमें से ज़्यादातर मामले तब डायग्नोज़ होते हैं जब बीमारी थर्ड या फोर्थ स्टेज में पहुंच चुकी होती है।
लेकिन क्या आप जानते हैं? अगर ब्रेस्ट कैंसर को पहली या दूसरी स्टेज में पकड़ लिया जाए, तो ठीक होने की संभावना 90% से भी अधिक हो सकती है।
इस ब्लॉग में हम आपको ब्रेस्ट कैंसर के बारे में वो सब कुछ बताएंगे जो आपको जानना चाहिए।
ब्रेस्ट कैंसर तब होता है जब स्तन की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं और एक गांठ (Tumor) का रूप ले लेती हैं।
यह ट्यूमर दो प्रकार का हो सकता है:
ब्रेस्ट कैंसर ज़्यादातर महिलाओं में होता है, लेकिन पुरुष भी इसकी चपेट में आ सकते हैं — हालांकि उनमें यह बहुत कम देखा जाता है।
यही वो हिस्सा है जिसे सबसे ध्यान से पढ़ें। ज़्यादातर महिलाएं इन संकेतों को नज़रअंदाज़ कर देती हैं क्योंकि उन्हें दर्द नहीं होता।
स्तन या बगल (Armpit) में एक कठोर, दर्दरहित गांठ महसूस होना ब्रेस्ट कैंसर का सबसे सामान्य शुरुआती संकेत है। यह गांठ छोटी मटर के दाने जितनी भी हो सकती है।
अचानक एक स्तन का दूसरे से काफ़ी बड़ा या छोटा दिखना, या स्तन की बनावट में असामान्य बदलाव आना।
बगल या कॉलरबोन के पास लिम्फ नोड्स में सूजन आना।
ज़रूरी बात: इन सभी लक्षणों का मतलब यह नहीं कि आपको कैंसर ही है। लेकिन इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें — देरी मत करें।
ब्रेस्ट कैंसर एक नहीं, बल्कि कई प्रकार का होता है। इसे समझना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि हर प्रकार का इलाज अलग होता है।
यह सबसे शुरुआती स्टेज है जिसमें कैंसर कोशिकाएं दूध की नलिकाओं (Milk Ducts) में होती हैं और बाहर नहीं फैली होतीं। इसे "Stage 0" भी कहते हैं। इस स्टेज में इलाज सबसे प्रभावी होता है।
यह ब्रेस्ट कैंसर का सबसे आम प्रकार है — लगभग 70-80% मामले इसी के होते हैं। इसमें कैंसर नलिकाओं से निकलकर आसपास के ऊतकों में फैल जाता है।
यह दूध बनाने वाली ग्रंथियों (Lobules) में शुरू होता है। यह पहचानने में थोड़ा मुश्किल होता है क्योंकि इसमें गांठ स्पष्ट रूप से महसूस नहीं होती।
यह एक आक्रामक प्रकार है जो हार्मोन रिसेप्टर्स से नहीं जुड़ा होता। इसका इलाज कीमोथेरेपी पर निर्भर करता है।
यह दुर्लभ लेकिन बहुत तेज़ी से बढ़ने वाला कैंसर है। इसमें स्तन लाल, सूजा हुआ और गर्म दिखता है। कई बार इसे संक्रमण समझकर नज़रअंदाज़ किया जाता है — यह गलती जानलेवा हो सकती है।
यह निप्पल और उसके आसपास की त्वचा को प्रभावित करता है। निप्पल पर खुजली, जलन और पपड़ी इसके मुख्य संकेत हैं।
ब्रेस्ट कैंसर का कोई एक निश्चित कारण नहीं है। यह कई कारणों के मिलने से होता है।
ध्यान दें: इनमें से कुछ कारक आपके नियंत्रण में हैं और कुछ नहीं। जो नियंत्रण में हैं, उन पर काम करना आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।
अगर आपको ऊपर बताए गए कोई भी लक्षण हैं, तो डॉक्टर निम्नलिखित जांचें कर सकते हैं:
कब करवाएं स्क्रीनिंग?
ब्रेस्ट कैंसर का इलाज कैंसर के प्रकार, स्टेज, और मरीज़ की उम्र व स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।
सर्जरी ब्रेस्ट कैंसर के उपचार का सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
उच्च-ऊर्जा किरणों से बची हुई कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है। आमतौर पर सर्जरी के बाद दी जाती है।
दवाओं के ज़रिए कैंसर कोशिकाओं को मारा जाता है। यह सर्जरी से पहले (ट्यूमर छोटा करने के लिए) या बाद में दी जा सकती है।
हार्मोन-रिसेप्टर पॉजिटिव कैंसर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन को ब्लॉक करने वाली दवाएं दी जाती हैं, जैसे Tamoxifen।
HER2-पॉजिटिव कैंसर में Trastuzumab (Herceptin) जैसी दवाएं दी जाती हैं जो सिर्फ कैंसर कोशिकाओं को टारगेट करती हैं।
ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर से लड़ने के लिए सक्रिय किया जाता है।
100% रोकथाम तो संभव नहीं, लेकिन जोखिम ज़रूर कम किया जा सकता है।
अगर आप या आपके परिवार में कोई ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण अनुभव कर रहा है, तो किसी अनुभवी विशेषज्ञ से परामर्श लेना बेहद ज़रूरी है। Dr. Harshit Srivastava , जो लखनऊ के एक अनुभवी Surgical Oncologist हैं, ब्रेस्ट कैंसर सहित सभी प्रकार के कैंसर के सर्जिकल उपचार में विशेषज्ञता रखते हैं। समय पर सही विशेषज्ञ से मिलना आपकी सबसे बड़ी जीत हो सकती है।
कैंसर की स्टेज यह बताती है कि बीमारी कितनी फैली है। इससे इलाज का रास्ता तय होता है।
| स्टेज | विवरण | ठीक होने की संभावना |
|---|---|---|
| Stage 0 | कैंसर केवल नलिकाओं तक सीमित | 99-100% |
| Stage I | छोटा ट्यूमर, लिम्फ नोड्स प्रभावित नहीं | 95-99% |
| Stage II | ट्यूमर बड़ा या पास के लिम्फ नोड्स में फैला | 75-90% |
| Stage III | आसपास के ऊतकों या कई लिम्फ नोड्स में फैला | 50-75% |
| Stage IV | दूर के अंगों (हड्डी, फेफड़े, लीवर) में फैला | 25-30% |
यह टेबल स्पष्ट करती है — जितनी जल्दी पहचान, उतना बेहतर इलाज।
यह बात कम लोग जानते हैं कि पुरुषों को भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है, भले ही बहुत कम। पुरुषों में इसके लक्षण वही होते हैं जो महिलाओं में — निप्पल से स्राव, छाती में गांठ, या निप्पल का अंदर धंसना। अगर किसी पुरुष को ये लक्षण दिखें, तो वो भी बिना झिझक डॉक्टर से मिलें।
ब्रेस्ट कैंसर एक गंभीर बीमारी है — लेकिन यह हार मानने की वजह नहीं, बल्कि सतर्क रहने की प्रेरणा है।
जागरूकता + समय पर जांच + सही इलाज = ज़िंदगी।
अपने शरीर को जानें, उसकी सुनें, और किसी भी बदलाव को नज़रअंदाज़ मत करें। अगर आपको या आपके किसी प्रियजन को ऊपर बताए गए लक्षण दिख रहे हैं, तो आज ही किसी विशेषज्ञ से मिलें।
याद रखें — सही समय पर उठाया एक छोटा कदम, ज़िंदगी का सबसे बड़ा फैसला हो सकता है।
Master course in Laparoscopic Liver Resections, Institute of Medical and Minimal Access Surgery Training Mumbai