क्या आपको पता है कि हर फेफड़ों का कैंसर एक जैसा नहीं होता? कुछ बहुत तेज़ी से फैलते हैं, तो कुछ धीरे-धीरे बढ़ते हैं और सर्जरी से ठीक भी हो सकते हैं। यही कारण है कि फेफड़ों के कैंसर के प्रकार को समझना बेहद ज़रूरी हो जाता है, क्योंकि सही प्रकार की पहचान ही सही इलाज की दिशा तय करती है। अगर आप या आपका कोई अपना इस बीमारी से जूझ रहा है, तो Lucknow में Best Surgical Oncologist की तलाश में Dr. Harshit Srivastava से मिलना एक भरोसेमंद कदम हो सकता है। इस ब्लॉग में हम आसान भाषा में समझेंगे कि Small Cell और Non-Small Cell Lung Cancer में क्या फर्क है।
फेफड़ों का कैंसर तब शुरू होता है जब फेफड़ों की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और नियंत्रण से बाहर हो जाती हैं। शुरुआत में इसके लक्षण बहुत मामूली लग सकते हैं, जैसे हल्की खांसी या थकान, इसलिए ज़्यादातर लोग इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन समय के साथ यह बीमारी शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल सकती है।
डॉक्टर इसे मुख्य रूप से दो बड़े वर्गों में बांटते हैं, और यही वर्गीकरण तय करता है कि मरीज़ को कीमोथेरेपी दी जाए, रेडिएशन या सर्जरी।
डॉक्टर आमतौर पर इन संकेतों पर जांच की सलाह देते हैं:
बहुत से मरीज़ और उनके परिवार यह गलती कर बैठते हैं कि हर तरह के लंग कैंसर का इलाज एक जैसा होता है। असल में ऐसा बिल्कुल नहीं है।
इसलिए बायोप्सी और सही जांच के बाद ही यह तय किया जाता है कि मरीज़ किस श्रेणी में आता है।
Small Cell Lung Cancer यानी लघु-कोशिका फेफड़ा कैंसर, फेफड़ों के कैंसर का एक ऐसा प्रकार है जो बहुत तेज़ी से बढ़ता है। यह लगभग 10-15% मामलों में पाया जाता है, लेकिन इसकी तेज़ी इसे ज़्यादा खतरनाक बना देती है।
चूंकि यह तेज़ी से फैलता है, इसलिए सर्जरी अक्सर एक विकल्प नहीं रह जाता। इसके बजाय डॉक्टर आमतौर पर कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के संयोजन का सहारा लेते हैं। शुरुआती स्टेज में पकड़ में आने पर इम्यूनोथेरेपी भी असरदार साबित हो सकती है।
Non-Small Cell Lung Cancer, फेफड़ों के कैंसर का सबसे आम प्रकार है और लगभग 80-85% मामलों में यही पाया जाता है। इसकी बढ़ने की रफ्तार SCLC के मुकाबले धीमी होती है, जिससे इलाज के ज़्यादा विकल्प मौजूद रहते हैं।
NSCLC खुद भी तीन मुख्य हिस्सों में बंटा होता है:
चूंकि यह धीरे बढ़ता है, इसलिए शुरुआती स्टेज में सर्जरी के ज़रिए ट्यूमर को पूरी तरह हटाया जा सकता है। इसके अलावा टारगेटेड थेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं, जिन्हें मरीज़ की स्टेज और स्वास्थ्य के हिसाब से चुना जाता है।
नीचे दिए गए बिंदुओं से आप आसानी से समझ सकते हैं कि दोनों में क्या फर्क है:
फेफड़ों के कैंसर के दोनों प्रकारों में कुछ लक्षण मिलते-जुलते हो सकते हैं। इन पर ध्यान देना ज़रूरी है:
अगर ऊपर बताए गए लक्षण कुछ हफ्तों से ज़्यादा समय तक बने रहते हैं, तो देर न करें और तुरंत डॉक्टर से जांच करवाएं।
बायोप्सी, सीटी स्कैन, पीईटी स्कैन और अन्य जांचों के ज़रिए यह पता लगाया जाता है कि मरीज़ को किस प्रकार का कैंसर है। यह जानकारी मिलने के बाद ही इलाज की सही रणनीति बनाई जा सकती है।
एक अनुभवी सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट सही समय पर सही निदान करके मरीज़ की जान बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। यही वजह है कि शुरुआती लक्षण दिखते ही किसी विशेषज्ञ से सलाह लेना समझदारी भरा कदम माना जाता है।
छोटे-छोटे ये कदम इलाज के परिणाम को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
फेफड़ों के कैंसर के प्रकार को समझना मरीज़ और परिवार दोनों के लिए एक ज़रूरी कदम है। Small Cell Lung Cancer तेज़ी से बढ़ता और फैलता है, जबकि Non-Small Cell Lung Cancer धीमी गति से बढ़ता है और इलाज के ज़्यादा विकल्प देता है। दोनों में अंतर जानने से मरीज़ को सही समय पर सही इलाज मिलने की संभावना बढ़ जाती है। अगर आपको या आपके किसी परिचित को लगातार खांसी, सांस लेने में तकलीफ या अस्पष्टीकृत वज़न घटने जैसे लक्षण दिख रहे हैं, तो देर किए बिना किसी योग्य विशेषज्ञ से जांच करवाएं। समय पर उठाया गया एक कदम पूरी ज़िंदगी बदल सकता है।
Master course in Laparoscopic Liver Resections, Institute of Medical and Minimal Access Surgery Training Mumbai